उत्तर प्रदेश

घर के भेदियों ने ढाई कानपुर मे लंका ! “चौबेपुर थाने के पुलिसकर्मियों पर उठ रहे सवाल”

मौ0 तारिक अंसारी

(न्यूज़ एडिटर)

लखनऊ:  कानपुर मे हुए हादसे को पूरा देश नहीं भूल सकता जहां अपराधी विकास दुबे को पकड़ने के लिए गई पुलिस पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना ने उत्तरप्रदेश की कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है| इस घटना के बाद हो रही जांच मे उजागर तथ्यों ने ये जगजाहिर कर दिया है की कहीं न कहीं अपराधी तभी वारदातों को अंजाम देते हैं जब उन्हे राजनीतिक संरक्षण और पुलिस का साथ मिल रहा हो | अगर बदमाशो को ये साथ न मिले तो उनकी मजाल नहीं की एक भी कदम कानून के विपरीत उठा दें| और ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि कानपुर कांड मे चल रही जांच के कुछ तथ्य बोल रहे हैं| जिनके सामने आने से ऐसा लग रहा है की विकास दुबे और उसके गुर्गों को कहीं न कहीं राजनीतिक सपोर्ट और पुलिस का आशीर्वाद मिला हुआ था |

 

आठ पुलिसकर्मियों की शहादत के बाद पूरा चौबेपुर थाना मुखबिरी के लिए शक के घेरे में है| यानि ऐसा माना जा रहा है की जरूर इस थाने से किसी न किसी ने विकास दुबे को पुलिस गतिविधि की जानकारी दी थी |  इसकी वजह से एसएसपी दिनेश कुमार पी ने पुलिस लाइन से 10 सिपहियों की तैनाती इस थाने में की है, ताकि कामकाज सुचारू ढंग से चलता रहे| आईजी मोहित अग्रवाल के मुताबिक इससे पहले सोमवार को दो दारोगा और एक सिपाही को सस्पेंड किया गया था। विकास दुबे की कॉल डीटेल से पता चला कि घटना के पहले चौबेपुर थाने में तैनात पुलिसवाले लगातार विकास के संपर्क में थे। चौबेपुर थाने में तैनात दरोगा कुंवर पाल, दरोगा कृष्ण कुमार शर्मा और सिपाही राजीव को सस्पेंड कर उनके खिलाफ जांच पहले से ही शुरू की जा चुकी है।

पुलिस पर लगे मुखबिरी के आरोप की जांच एसटीएफ भी अपने स्तर से कर रही है। एसटीएफ की जांच में भी एक बड़ा खुलासा हुआ है। दबिश से करीब साढ़े सात घंटे पहले दहशतगर्द विकास दुबे से एक दरोगा और सिपाही की बातचीत फोन पर हुई थी। जिन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, उसमें ये दरोगा-सिपाही भी शामिल हैं। इन्हीं दोनों के जरिये विकास को दबिश की जानकारी हुई। चौबेपुर एसओ ने बात की है या नहीं इसकी जांच जारी है। बातचीत के बाद दबिश दी गई और पुलिस पर हमला हुआ तो निश्चित है कि दबिश की सूचना बदमाश को पहले दे दी गई होगी। वारदात से पहले विकास दुबे के गांव में बिजली काटी गई थी| कहा ये भी जा रहा है की बिजली काटने के लिए थाने से फोन गया था, जिसे लेकर ये सवाल उठ रहा था कि इसके पीछे कौन शामिल है|

 

विकास दुबे पर 2001 में राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या का आरोप है| इस जघन्य हत्याकांड को कानपुर में थाने के समाने ही अंजाम दिया गया था | इस हत्याकांड के 16 साल बाद विकास को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था| लेकिन पिछले साल उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया |  बाहर निकलते ही विकास ने फिर से आतंक मचाना शुरू किया| 2019 अगस्त में पुलिस ने उसे सड़क टेंडर को लेकर धमकी देने के आरोप में हिरासत में लिया था| विकास प्रधान और जिला पंचायत सदस्य भी रह चुका है| चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू निवासी विकास दुबे को कानपुर पुलिस ने 2017 में शिवराजपुर थाने में दर्ज कराए गए जानलेवा हमले सहित अन्य धाराओं के मुकदमे में भी तलाश कर रही थी|

विकास के बारे में कहा जाता है कि वो जेल के अंदर रहकर भी हत्या की साजिश रचता रहा है. इन हत्याओं में एक अपने चचेरे भाई अनुराग की हत्या का भी मामला है| इसके खौफ का आलम ये रहा कि ये जेल में रहने के दौरान शिवराजपुर से नगर पंचायत चुनाव जीत चुका है और प्रधान रह चुका है| कहा जाता है कि विकास की पहुंच राज्य की हर पार्टी में है| आजकल सोशल मीडिया पर विकास दुबे के फोटो प्रधानमंत्री से लेकर देश के गृह मंत्री तक और तमाम राजनैतिक दलों के उच्च नेताओं के साथ वायरल भी हो रहे हैं |

फिलहाल विकास दुबे पुलिस की गिरफ्त से दूर है और ये कोई नहीं जनता की दुबे इस वक़्त कहाँ है और किसके संरक्षण मे है| लेकिन पुलिस विकास को पकड़ने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही है| विकास पर ढाई लाख रुपए का इनाम घोषित है| और विकास और उसके रिशतेदारों की संपत्ति को पुलिस नेस्तोनाबूत कर चुकी है | अब पूरी यूपी की पुलिस को इंतज़ार है तो सिर्फ विकास दुबे के पकड़े जाने का और उससे ये पूछताछ करने का की आखिर उसका साथ किस किस ने दिया और कौन घर का भेदी बना |

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