उत्तर प्रदेश

विकास दुबे का एनकाउंटर छोड़ गया इतने सवाल, क्या मिलेंगे इन सब सवालों के जवाब ?

मौ0 तारिक अंसारी

(न्यूज़ एडिटर)

लखनऊ /कानपुर : कानपुर के बिकरू गांव में सीओ समेत 8 पुलिस वालों की हत्या करने वाला गैंगस्टर विकास दुबे शुक्रवार सुबह एनकाउंटर में मारा गया। यूपी एसटीएफ की टीम उसे उज्जैन से कानपुर ले जा रही थी, लेकिन शहर से 17 किमी पहले बर्रा थाना क्षेत्र में सुबह 6:30 बजे काफिले की एक कार पलट गई। बताया जा रहा है विकास ने गाड़ी गिरने के बाद पुलिस से पिस्टल छीनकर हमला करने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में वह बुरी तरह जख्मी हो गया। उसे सीने और कमर में दो गोली लगीं। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे सुबह 7 बजकर 55 मिनट पर मृत घोषित कर दिया। कानपुर रेंज के आईजी ने विकास के मारे जाने की पुष्टि की। विकास को गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया था। विकास के शव से कोरोना की जांच के लिए सैंपल भी लिए गए हैं।

आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मास्टरमाइंड विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया है| एनकाउंटर में गंभीर रूप से घायल हुए विकास दुबे की मौत हो गई है| इस एनकाउंटर में चार पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं | कानपुर के एसएसपी दिनेश कुमार ने एनकाउंटर की पुष्टि की है| एसएसपी दिनेश कुमार के मुताबिक पुलिस ने कई बार उसे सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी | जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे को सीने और कमर में गोली लगी| सुबह मीडिया की गाड़ियों को एनकाउंटर वाली जगह से पहले रोक दिया गया था| मीडिया की गाड़ियों को रोकने के बाद पुलिस का काफिला आगे बढ़ा और थोड़ी ही दूरी पर एक्सीडेंट हुआ और फिर एनकाउंटर हो गया| माना जा रहा है कि तेज बारिश की वजह से गाड़ी पलट गई। एनकाउंटर में एसटीफ के 4 जवान घायल हुए हैं।

इससे पहले बुधवार देर रात विकास दुबे के एक और करीबी प्रभात मिश्रा मारा गया था। प्रभात को पुलिस ने बुधवार को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया था। यूपी पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर कानपुर ले जा रही थी। रास्ते में प्रभात ने भागने की कोशिश की, उसने पुलिस की पिस्टल छीनकर फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में प्रभात मारा गया। पुलिस ने बुधवार को ही विकास के करीबी अमर दुबे का भी एनकाउंटर कर दिया था। अमर हमीरपुर में छिपा था। अब तक विकास गैंग के 5 लोग एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।

 

भले ही विकास दुबे एंकाउंटर मे मारा गया लेकिन ये सवाल अभी भी ज़िंदा हैं जिनके जवाब शायद ही अब मिल सकें |

  1. कानपुर के बिकरू गांव में जब पुलिस विकास दुबे को पकड़ने गई तो विकास दुबे को आखिर किसने फोन करके बताया ?
  2. क्या विकास दुबे का एनकाउंटर किसी दबाव में किया गया है ? क्योंकि इससे कई लोगों का राजफाश होने की आशंका थी जिसमें लगभग सभी पार्टियों को लोग शामिल थे ?
  3. विकास दुबे के ऊपर किन नेताओं का हाथ था और किनकी मदद से उससे पुलिस महकमा खौफ खाता था ?
  4. क्या उज्जैन में उसका आत्मसमर्पण कराने के लिए भी कई लोग शामिल थे क्योंकि जब 7 राज्यों की पुलिस अलर्ट पर थी तो वह किसी के गिरफ्त में क्यों नहीं आया ?
  5. वो कौन लोग थे जिनके दबाव मेंविकास दुबे का जिले या प्रदेश के टॉप-10 बदमाशों में शामिल नहीं था जबकि उसके ऊपर 60 मुकदमे चल रहे थे ?
  6. क्या विकास दुबे अपनी गैर-कानूनी तरीके से कमाई गई रकम का कुछ हिस्सा पुलिसकर्मियों में भी बांटता था और अगर ये सच था तो कौन-कौन इसमें शामिल था?

जिस समय विकास दुबे के गिरफ़्तार होने की ख़बर आई थी उसी समय यह आशंका जताई गई थी कि कोर्ट में पेश किए जाने से पहले कहीं उसे मुठभेड़ में मार तो नहीं दिया जाएगा? और हुआ भी यही। इस मुठभेड़ पर सवाल खड़े होते रहेंगे? ये सवाल इसलिए भी खड़े होंगे क्योंकि कई रिपोर्टों में यह कहा गया कि विकास दुबे ने सरेंडर किया है। यह इस बात की भी पुष्टि करता है कि महाकाल मंदिर में वह कहता है कि ‘मैं विकास दुबे हूँ कानपुर वाला’। और जब पुलिस ने दावा किया कि उसे गिरफ़्तार किया गया है तब विकास दुबे के पास कोई हथियार भी नहीं था। एक सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि उस गाड़ी में एसटीएफ़ के जवान थे और उसमें सिर्फ़ विकास दुबे ही अपराधी था। जब गाड़ी पलटी तब एक बदमाश क्या उतने सारे पुलिसकर्मियों से बंदूक छीन कर भाग सकता है?  और क्या उसे पकड़ना इतना मुश्किल हो सकता है? कि उसे गोली मारना पड़े!

 

 

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