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अभिनेता मनोज कुमार जी की जिंदगी की जानिए पूरी कहानी

(शरीफ अंसारी)

मनोज कुमार का जन्म उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (अब खैबर पख्तुन्छ्वा) पाकिस्तान के एक शहर एबटाबाद में हुआ था, जो की विभाजन पूर्व भारत का एक हिस्सा था। उनका मूल जन्म नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी था। जब वह 10 साल के थे, तो उनके परिवार को विभाजन के कारण जधियाला शेर खान से दिल्ली जाना पड़ा था। उनका परिवार विजय नगर, किंग्सवे कैंप में शरणार्थियों के रूप में रहा और बाद में नई दिल्ली के पुराने राजेंद्र नगर इलाके में चले गए।

हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद, उन्होंने फ़िल्म उद्योग में प्रवेश करने का फैसला किया।

उनके अभिनय का सितारा निर्माता-निर्देशक विजय भट्ट की 1962 में प्रदर्शित क्लासिक फिल्म “हरियाली और रास्ता” में चमका | फिल्म में उनके अपोजिट माला सिन्हा थी | दोनों की जोड़ी को दर्शको ने बेहद पसंद किया | 1964 में उनकी एक ओर सुपरहिट फिल्म “वो कौन थी” प्रदर्शित हुयी | 1965 में ही मनोज कुमार (Manoj Kumar) की एक ओर सुपरहिट फिल्म “गुमनाम” भी प्रदर्शित हुयी | इस फिल्म में रहस्य और रोमांच के ताने-बाने , मधुर गीत-संगीत और ध्वनि का कल्पनामय इस्तेमाल किया गया था | वर्ष 1965 में ही उन्हें विजय भट्ट की फिल्म “हिमालय की गोद में” में काम करने का मौका मिला ,जो टिकिट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुयी |

1965 में प्रदर्शित फिल्म “शहीद” उनके सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मो में शुमार की जाती है | देशभक्ति के जज्बे से परिपूर्ण इस फिल्म में उन्होंने शहीद-ए-आजम भगत सिंह की भूमिका को रुपहले पर्दे पर साकार किया | 1967 में प्रदर्शित फिल्म “उपकार” में वह किसान की भूमिका के साथ ही जवान की भूमिका में भी दिखाई दिए | फिल्म में उनके चरित्र का नाम भारत था | बाद में मनोज कुमार (Manoj Kumar) इसी नाम से वो फिल्म इंडस्ट्री में भी मशहूर हो गये | 1970 में उनके निर्माण और निर्देशन में बनी एक ओर सुपरहिट फिल्म “पूरब और पश्चिम” प्रदर्शित हुयी | फिल्म के जरिये उन्होंने ऐसे लोगो की कहानी दिखाई जो दौलत के लालच में अपने देश की मिटटी छोडकर पश्चिम में पलायन कर गये |

वर्ष 1972 में मनोज कुमार (Manoj Kumar) के सिने करियर की एक ओर महत्वपूर्ण फिल्म “शोर” प्रदर्शित हुयी | 1974 में प्रदर्शित “रोटी कपड़ा और मकान” उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मो में शुमार की जाती है | इस फिल्म के जरिये उन्होंने समाज की अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट की |

पसंद-नापसंद !!

मनोज कुमार अकसर बंद गले के कपड़े पहनना पसंद करते हैं। फिर चाहे वह कुर्ता हो या शर्ट। इसके अलावा आप मनोज कुमार के एक हाथ को अकसर उनके अपने मुंह पर रखा पाएंगे। मनोज कुमार को फ़िल्मों में रोमांस के बजाय देशभक्ति फ़िल्में करना ज्यादा भाया। मनोज कुमार ने वर्ष 1957 में बनी फ़िल्म ‘फ़ैशन’ के जरिए बड़े पर्दे पर क़दम रखा। प्रमुख भूमिका की उनकी पहली फ़िल्म ‘कांच की गुडि़या’ (1960) थी। बाद में उनकी दो और फ़िल्में पिया मिलन की आस और रेशमी रुमाल आई लेकिन उनकी पहली हिट फ़िल्म ‘हरियाली और रास्ता’ (1962) थी। मनोज कुमार ने वो कौन थी, हिमालय की गोद में, गुमनाम, दो बदन, पत्थर के सनम, यादगार, शोर, संन्यासी, दस नम्बरी और क्लर्क जैसी अच्छी फ़िल्मों में काम किया। उनकी आखिरी फ़िल्म मैदान-ए-जंग (1995) थी। बतौर निर्देशक उन्होंने अपनी अंतिम फ़िल्म ‘जय हिंद’ 1999 में बनाई थी।

मनोज कुमार को वर्ष 1972 में फ़िल्म बेईमान के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और वर्ष 1975 में रोटी कपड़ा और मकान के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फ़िल्मफेयर अवार्ड दिया गया था। बाद में वर्ष 1992 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मनोज कुमार को फालके रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

पुरस्कार

1992- भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार

1968- फ़िल्म ‘उपकार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ कथा और सर्वश्रेष्ठ संवाद श्रेणी में फ़िल्मफेयर पुरस्कार !

1972 – फ़िल्म ‘बेईमान’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्मफेयर पुरस्कार !

1975 – फ़िल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फ़िल्मफेयर पुरस्कार !

1999 – लाइफ़ टाइम अचीवमेंट के लिए फ़िल्मफेयर पुरस्कार !

2016- भारत सरकार द्वारा दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित।

मनोज कुमार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

1. मनोज कुमार का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जब वह 10 वर्ष के थे, तब उनके परिवार ने एबटाबाद, पाकिस्तान को छोड़ दिया और दिल्ली चले गए।

2. वह अपने परिवार के साथ भारत विभाजन के समय आए, उस समय उनका परिवार विजय नगर के किंग्सवे कैंप में शरणार्थियों के रूप में रहा और बाद में नई दिल्ली के पुराने राजेंद्र नगर में चला गया।

3. बचपन से ही वह दिलीप कुमार और अशोक कुमार से प्रेरित थे। जिसके चलते उन्होंने अपना नाम मनोज कुमार रखने का फैसला किया। हालांकि, उनका वास्तविक नाम हरिकृष्णा गिरी गोस्वामी था।

4. मनोज कुमार का अभिनय करियर वर्ष 1957 की फ़िल्म फ़ैशन से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने एक 80 वर्षीय व्यक्ति की भूमिका निभाई थी।

5. वर्ष 1965 की फिल्म शहीद के बाद, मनोज कुमार की छवि एक देशभक्त के रूप में स्थापित हो गई। यह फिल्म स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के जीवन पर आधारित थी।

6. वर्ष 1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें एक लोकप्रिय नारा “जय जवान जय किसान” के आधार पर एक फिल्म बनाने के लिए कहा। जिसके चलते उन्होंने वर्ष 1967 में “उपकार” फिल्म को निर्देशित किया, जिसमें उन्होंने एक सैनिक और एक किसान की भूमिका निभाई थी।

7. उन्हें फिल्म उपकार के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

8. वर्ष 1981 में, उन्होंने फिल्म क्रांति का निर्देशन किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट रही थी। परन्तु इसके बाद उनके फिल्म करियर का ग्राफ तेज़ी से गिरने लगा, क्योंकि उनकी फिल्में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं।

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