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बदायूं मुस्लिम परिवार में पैदा हुई बेटी ने जरीदोजी की सुई से कपड़े पर भव्य राम मंदिर बना कर जिले में ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश में बटोर रही है सुर्खियां

रिपोर्ट:-नियाज़ी खान

बदायूँ में कला किसी परिचय की मोहताज नही होती और न ही मजहबी बेड़ियां उसको गुलाम बना सकती है।तराशने वाला मिल जाये तो सड़क पर पड़ा पत्थर भी पूजा जाने लगता है।कुछ ऐसे ही ख्वाब अपनी सुई से कपड़े पर सजाती हुई माही खान को देख कर लोगो की नजर ठहर जाती है और जुबान से वाह निकल जाती है।मुगलिया यादों को समेटे मकबरों के शहर शेखुपुर से निकली यह रिपोर्ट देखिये।


रिवायत और तहजीब के लिए मशहूर नवाबो के शहर और मुगल बादशाह शाहजहां लेकर भारत के पूर्व राष्ट्रपति जनाब फखरुद्दीन की ससुराल तक का इतिहास समेटे शेखुपुर की रहने वाली और अभावों के बीच पली और बड़ी हुई शहर रईस उर्फ माही खान बैसे तो कोई बहुत बड़ा नाम नही है लेकिन मुस्लिम परिवार में पैदा हुई बेटी ने जरीदोजी की सुई से कपड़े पर भव्य राममंदिर बना कर जिले में ही नही पूरे उत्तर प्रदेश में सुर्खियां बटोरी हैं। 16 दिन की उम्र में पिता का साया सर से उठ जाने के बाद अभावग्रस्त जिंदगी गुजारते हुए बड़ी हुई माही में शुरू से ही कुछ अलग करने की चाह थी उनकी दास्तान के बहुत से दिलचस्प पहलू हैं जिनसे न्यूज़ नेशन रूबरू कराने वाला है।उनका मानना है कि राम सबके हैं और बे बेखौफ होकर जय श्रीराम भी बोलती हैं।उनकी कलाकृतियां प्रदेश स्तर पर आयोजित नुमाइशो में भी वाहवाही बटोर चुकी हैं।उनका कहना है कि उनके हुनर को निखारने में सूबे में चलाई जा रही वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना से मिली आर्थिक मदद ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है ।बे अपने बनाये गए प्रभु श्रीराम के मंदिर को सूबे के मुख्यमंत्री को भेंट करना चाहती हैं।बे जरीदोजी के काम से लगभग 200 परिवारों को भी रोजी रोटी मुहैया करा रही हैं।

माही खान के राममंदिर बनाने के फैसले पर उसके परिवार के लोग भी फख्र महसूस करती हैं उनका कहना हैकि भले ही लोगो का नजरिया उसके प्रति अलग हो लेकिन उनकी बहन ने उनका सर फख्र से ऊंचा कर दिया है और परिवार के लोग पूरी तरह उसके साथ हैं।राम सबके हैं और राम रहीम एक ही हैं।लोग कहते हैं कि लोन लेने से घाटा होता है लेकिन हमारी जिंदगी ही बदल गई।राशिदा बेगम,शहर रईस उर्फ माही की बहन।

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