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बलिया टूटी और सड़ी लकड़ियों के सहारे यूपी और बिहार को जोड़ती पीपा पुल दे रहा मौत को दावत

रिपोर्ट:-संजय कुमार तिवारी

 

यूपी के बलिया में यूपी और बिहार को जोड़ने वाली खरीद दरौली घाट पर बना पीपापुल बड़े हादसे का दावत दे रहा हैं जहाँ पीपापुल में टूटी स्लीपर का सहारे पीपापुल का संचालन कराया जा रहा हैं। जहाँ पुरानी लकड़ियां और पतली बल्लियों के सहारे पूल का संचालन किया जा रहा हैं। भारी वाहनों का आवागमन चालू कर दिया गया हैं। वही अवर अभियंता ने बताया कि अपने विभाग को व् अधिकारियो को पूल के बारे में जानकारी दे दी गई हैं।

बलिया जनपद के सिकन्दरपुर खरीद दरौली घाट पर पीपा पूल बनाया गया है जो यूपी बिहार को जोड़ता हैं इस पीपा पूल में पुरानी और सड़ी लकड़ियों को लगाया गया हैं जहाँ यह लकड़ियां बड़े हादसे को दावत दे रही हैं।आप जरा गौर से इस पीपा पूल में लगाई गई लकड़ियों को देखिये टूटी लकड़ियों के सहारे ही पीपा पूल को बन गया। जरा पूल की बारीकियों को देखिये एक तो सड़ी लकड़ियां और दूसरी तरफ टूटी लकड़ियां दिखाई दे रही हैं इतना ही नही इस पीपा पूल लगाई गई लकड़ियां भी कम लगी हुई हैं । जिससे पूल में दुरी दिखाई दे रही हैं। कई जगह खाली खाली जगह दिखाई दे रहा हैं। इसमे कहि कहि पतली बल्लियों का भी सहारा लिया गया हैं।

जरा ग्रामीणों की सुनिए क्या कह रहे हैं इस पीपा पूल के बारे में इस पूल में लकड़ी हैं नही और कुछ नही है काफी दिक्कत हो रही है चार दिन पहले एक व्यक्ति मोटरसाइकिल से पीपा पूल से गिर गया था काफी दिक्कतों के बाद मोटरसाइकिल वाले को निकाला गया। इस साल काफी दिक्कतें है काफी परेशानियां हैं टूटी लकड़ियां और पतली बल्ली लगाई गई है ये पुलिया बिहार के कई जनपद को जोड़ती हैं अगर औ भागलपुर से होकर सिवान जाते हैं तो 100 किलोमीटर दुरी ज्यादा होती हैं। अगर इस पूल से काफी दुरी कम हो जाती है अगर इस से लगभग दुरी चार से पाँच किलोमीटर ही जाना हैं न ठीकेदार एक्शन लेता है और जेई आते हैं और चले जाते हैं और इसमे कोई भी दुर्घटना हो सकती हैं। पर आने जाने वाले लोगो को भी डर लग रहा हैं।

जरा अवर अभियंता शैलेंद्र कुमार की सुनिये एक कहना है कि एक दो दिन में लकड़ियां पहुचने वाली हैं जैसे ही अति हैं। उन लकड़ियों को रिप्लेस करके लगा दी जायेगी। रास्ता चालू कर दिया गया हैं। सड़ी लकड़ियां नही है लेकिन काम हमारा चल जायेगा और लोडेड गाड़ियां नही जाएँगी।सवारी भरकर गाड़िया नही जा पाएंगी।

ख़ाली गाड़ियों को भेज रहे हैं।बल्ली इस लिए लगाए जाते हैं जैसे दो स्लीपर हैं उनके बीच में लगाये जाते है कि स्लीपर हिले न इस लगाई जाती है नही लगाने पर स्लीपर हिलने लगता हैं और लोड बढ जातीहैं। उसके बाद टूट जाती हैं इस लिए बल्ली लगाई जाती हैं कि टूटे न अगर हैवी गाड़ियां आ जाती हैं तो टूटने की सम्भावना बढ़ सकती हैं।इसके लिए विभाग को भी सुचना दे दी गई हैं और ऊपर के अधिकारियो को भी बता दिया गया हैं। कि हमारी कंडीशन ये हैं इसमे स्लीपर नही इसमे आवश्यकता हैं। इस रास्ते को 25 दिसम्बर से चालू कर दिया गया हैं।

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