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बेरहम इंस्पेक्टर का कारनामा ,छेड़खानी की शिकायत लेकर थाने पहुंचे दलितो को बेरहमी से की पिटाई

रिपोर्ट:-संजय कुमार तिवारी

 

बलिया सिकंदरपुर में छेड़खानी का विरोध करने पर मार खाये दलितो के लिये थाना भी सहायता करने की बजाय छेड़खानी करने वालो के साथ मिलकर शिकायतकर्ताओं की थाने में ही बेरहमी से पिटाई कर दी और जब एक युवक मार खाने से बेहोश हो गया तो उसे स्थानीय अस्पताल में शराब पी कर बेहोश हुए लावारिश कह कर छोड़ दिये ।

घटना के दो दिन हो जाने के बाद भी थानाध्यक्ष व अन्य पुलिस कर्मियों पर कोई कार्यवाही न होना थानेदार के रसूखदार होने को दर्शाने के लिये काफी है । गंभीर रूप से घायल दो दलित युवक व उनके परिजन अपने ऊपर हुए जुल्मोसितम की दास्तां कह रहे है लेकिन बलिया पुलिस के आलाधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए है । वही दलितो का आरोप है कि अब दबंग थानेदार बयान बदलने का दबाव डाल रहे है जिससे ये लोग दहशत में है ।
घटना के सम्बंध में बताया जा रहा है कि सिकंदरपुर के इसारपीथा पट्टी के दलित परिवार की लड़की को राजभर बिरादरी के लड़कों द्वारा छेड़ा गया जिसकी शिकायत जब लड़की के परिजनों ने लड़को के परिजनों से की तो राजभर लोगो ने शिकायतकर्ताओं की पिटाई कर दी । घायल दलित जब स्थानीय अस्पताल में मेडिकल कराने गये तो चिकित्सक ने मारपीट का मामला होने के कारण पहले थाने में शिकायत करके पुलिस के साथ आने की बात कहकर थाने भेज दिया । थाने पहुंचने के बाद इन लोगो के साथ राइफल के कुंदों से की गई पिटाई यह साबित करती है कि थानेदार बाल मुकुंद मिश्र का छेड़खानी करने वालो के साथ कोई न कोई गठबंधन जरूर है, अन्यथा सीएम योगी की सरकार में छेड़खानी करने वाले मार खाते न कि पीड़िता के परिजन ।बता दे कि थानेदार श्री मिश्र जब से थाना प्रभारी बने है अपराधों की बाढ़ आने के बावजूद इनकी थानेदारी सुरक्षित है । पत्रकार का एक साल पहले दिन में ही ऑफिस का ताला तोड़कर लैपटॉप चोरी कर लिया गया जिसकी रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद आजतक पता नही लग पाया है । एक व्यक्ति के घर पर असलहे के बल पर डकैती का प्रयास किया गया था , डकैतों को ग्रामीणों ने दौड़ाया था जिसमे एक व्यक्ति को गोली भी लगी थी और ग्रामीणों ने एक डकैत को पकड़ कर पुलिस के हवाले भी किया था लेकिन उस घटना को भी श्री मिश्र डकैती नही दर्ज किये । दियरांचल में कच्ची शराब की बिक्री में कोई कमी नही है, फिर भी साहब की कुर्सी को कोई खतरा नही है । अब छेड़खानी होने के बाद भी अगर पीड़ितों की ही पिटाई थाने में पुलिस करती है और पीड़ित अस्पताल से ही गंभीर आरोप लगाते है, मीडिया में खबरे चलती है और कार्यवाही नही हो तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि बलिया में रामराज स्थापित हो चुका है ।

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