समाचार

बिजनौर में किरतपुर ब्लॉक के दुधली गांव में सरकारी हैंडपम्पों पर गांव निवासियों ने ही कर लिया कब्ज़ा, ग्राम प्रधान और वी डी ओ क्यों हैं खामोश

सिटिज़न जर्नलिस्ट

हाशिम अहमद आज़मी

 

बिजनौर/किरतपुर: कहते हैं किसी भी देश के विकास में प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा हाथ होता है, और बात अगर गांव की हो तो ग्राम प्रधान ही किसी भी गांव के विकास का जरिया बनता है । लेकिन आज हम आपको बिजनौर के एक ऐसे गांव की कहानी बताएंगे जहां की तस्वीर खुद अपनी दास्तान बयान करेगी।ये तस्वीर जिला बिजनौर में ब्लॉक किरतपुर के दुधली गांव की है, इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कुछ लोगों के द्वारा सरकारी हैंडपम्प पर कब्ज़ा कर उन पर मोटर लगाई गईं हैं और फायदा ग्राम वासियों को मिलने की बजाय मोटर वाले को मिल रहा है।


दूसरी तस्वीर देखकर आप ये अंदाज़ा नही लगा सकते कि पहले घर बना होगा या हैंडपम्प लगा होगा ये तस्वीर ये सवाल भी पैदा करती है कि क्या सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करके घर बनाया गया है? या फिर घर बनने के बाद हैंडपम्प लगवाया गया है?ऐसी तस्वीरें इस गांव में और भी देखने को मिल सकती हैं लेकिन ये दो तस्वीरें ही गांव की हालत दिखाने के लिये काफी है। ये लापरवाही है या भूलचूक बहराल सवाल इस बात का है कि ग्राम प्रधान शमीमा खातून और गांव के वी डी ओ का ध्यान इस तरफ अब तक क्यों नही गया ? और अगर गया तो सरकारी हैंडपम्प प्राइवेट तरीके से क्यों इस्तेमाल करने दिये गए और दिये जा रहे हैं? क्या ग्राम प्रधान को इन परिवारों से कुछ लाभ मिल रहा है? क्या ग्राम प्रधान के साथ वी डी ओ की भी इन परिवारों के साथ कोई सांठगांठ है? या ये हैंडपम्प कब्ज़ामुक्त कराने की किसी मे हिम्मत नही है?

कारण चाहे जो भी लेकिन एक बात तो साफ है कि कुछ गांव वालों का ये रवैय्या और प्रधान और वी डी ओ की इस पर चुप्पी प्रधानमंत्री द्वारा गांव के विकास के लिये किये गये वादों पर ग्रहण लगा रही है, और सरकारी पैसे का दुरुपयोग करा रही है। अब सवाल ये है कि आखिर वी डी ओ और ग्राम प्रधान कब नींद से जागकर कार्यवाई करते हैं और हैंडपम्पों को कब्ज़ा मुक्त कराते हैं? शर्म की बात तो ये है कि इस गांव के कुछ धार्मिक स्थलों पर लगाये गए हैंडपम्पों का भी यही हाल है, वहां भी मोटर बंधे हुए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *