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गरीबी का आलम ये है की अपनी किडनी बेच रहे हैं यहाँ के लोग….

न्यूज़ डेस्क: अफगानिस्तान से जबसे अमेरिका, यूके ने अपने सैनिक हटाए हैं, तबसे वहां की हालत खराब होने लगी है. अब इस देश में जिंदा रहने के लिए लोग अपनी किडनी बेच रहे हैं. गरीबी का आलम ऐसा है कि लोग यहां पैसों के लिए औने-पौने दाम में अपनी किडनी बेच रहे हैं. तालिबान ने अफगानिस्तान में अगस्त 2021 से ही तबाही मचाना शुरू कर दिया था. अब ऐसे हालात हैं कि लोगों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है.

अफगानिस्तान के लोकल लोगों ने बताया कि बीस साल के बाद अब ऐसे हालात हो चुके हैं कि लोगों के पास खाने-पीने की चीजों की कमी हो गई है. सिर्फ कुछ ही महीनों में हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को पैसों के लिए अपने बॉडी पार्ट बेचना पड़ रहे हैं. द मिरर की खबर के मुताबिक़, कुछ समय पहले अफगानिस्तान की महिलाओं द्वारा पैसों के लिए अपने बच्चे बेचने की खबर भी सामने आ चुकी है


अफगानिस्तान के यूरोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ नासिर अहमद ने जानकारी देते हुए कहा कि बीते 12 महीने में उन्होंने खुद 85 किडनी निकाले हैं. यहां एक किडनी साढ़े चार लाख रूपये में बिकता है. इसमें हॉस्पिटल का खर्च, दवाइयां और ऑपरेशन फीस शामिल है. डॉ अहमद ने बताया किडनी बेचना अपनी जिंदगी को खतरे में डालना है. पैसों की कमी के कारण किडनी बेच देने के बाद लंबे समय के लिए लोगों को नुकसान होता है.

बता दें कि अफगानिस्तान में किडनी डोनेट करने का कल्चर नहीं है. यहां किडनी बेचने का कल्चर है. गरीब लोग चंद पैसों के लिए किडनी बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं. पैसों की कमी के कारण किडनी बेचने की खबर पर तालिबान ने सफाई देते हुए कहा कि वो लोगों के बीच राशन बांट रहा है. वहीं यूएन ने कहा कि वो भी करोड़ों की मदद अफगानिस्तानियों को दे रहा है. करीब 40 हजार वर्कर्स को हर दिन 10 किलो गेंहू दिया जा रहा है. इसके बाद भी लोग पैसों के लिए किडनी बेच रहे हैं.

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