गैलरी

इस दांव से बीजेपी पलट देती है राज्यों मे हारी हुई बाज़ी, ये है बीजेपी की चाणक्य नीति ….

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश चुनाव की तस्वीर अब साफ हो चुकी है. बीजेपी अपना दल और निषाद पार्टी के साथ मैदान में है तो समाजवादी पार्टी ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, शिवपाल सिंह यादव की पार्टी के अलावा रालोद के साथ मैदान में है. बसपा और कांग्रेस अभी तक अकेले मैदान में हैं. बीजेपी ने इस बार योगी आदित्यनाथ के चेहरे को आगे कर चुनाव में जाना तय किया है. 2017 में बीजेपी ने किसी को बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं किया था. उत्तर प्रदेश के अलावा बीजेपी ने गोवा में प्रमोद सावंत, उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी और मणिपुर में एन बीरेन सिंह के चेहरे को आगे किया है. केवल पंजाब में बीजेपी ने मुख्यमंत्री का चेहरा आगे नहीं किया है और वो इसलिए कि पंजाब से पार्टी को कोई खास उम्मीद नहीं है. इस तरह 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव होगा, जिसमें बीजेपी 4 मुख्यम़त्रियों के चेहरे पर चुनाव लड़ने जा रही है. देखना दिलचस्प होगा कि अब तक पीएम मोदी के नाम पर करिश्मा करती आई बीजेपी इन मुख्यमंत्रियों के चेहरे पर चुनाव जीत पाती है या नहीं.
खबर में खास

हरियाणा और महाराष्ट्र में पहली बार बनी सरकार
उत्तर प्रदेश—उत्तराखंड में किया था कमाल
इन तीन राज्यों में लगा गहरा धक्का
मुख्यमंत्रियों के भरोसे पर हो गई बुरी गत
पीएम मोदी के नाम पर देश भर में छा गई बीजेपी
कुछ राज्य अब भी बने हुए हैं बीजेपी के लिए चुनौती
हरियाणा और महाराष्ट्र में पहली बार बनी सरकार

2014 के बाद अधिकांश मौकों पर बीजेपी पीएम मोदी के चेहरे पर विधानसभा चुनाव भी जीतती रही है. 2014 के अंत में जब महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव हुए थे, तब भी पीएम मोदी के चेहरे को आगे किया गया था और उसका असर भी हुआ. दोनों राज्यों में बीजेपी ने कमाल का प्रदर्शन किया था. हालांकि 2015 में दिल्ली और बिहार के अलावा झारखंड में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिनमें झारखंड में बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर कामयाबी हासिल की लेकिन दिल्ली और बिहार में यह फॉर्मूला कामयाब नहीं रहा. 2016 के असम सहित 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे को आगे किया और कांग्रेस को असम से उखाड़ फेंका था. उस समय पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में बीजेपी का कोई करिश्मा काम नहीं कर पाया था.

उत्तर प्रदेश—उत्तराखंड में किया था कमाल

2017 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों के चुनाव थे, जिसमें पार्टी ने वहीं रणनीति अपनाई. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पार्टी ने पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़कर विपक्षी दलों को धूल चटा दी, वहीं गोवा और मणिपुर में बहुमत न होने पर भी बीजेपी सरकार बनाकर बहुमत साबित करने में सफल रही थी. यही नही इन दोनों राज्यों में पार्टी ने पूरे 5 साल तक सरकार चला भी ली. गोवा में तो कांग्रेस का सफाया हो गया है और तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस के अधिकांश नेताओं को अपने कुनबे का हिस्सा बना लिया है. 2017 के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हुए. हिमाचल में बीजेपी पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ी तो गुजरात में मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के चेहरे पर. हालांकि पीएम मोदी ने वहां काफी मेहनत की तब जाकर बीजेपी मामूली बहुमत से सरकार बना पाई थी.
इन तीन राज्यों में लगा गहरा धक्का

इसके बाद वो साल आया, जब पीएम मोदी और बीजेपी को जोरदार झटका लगा और लगा कि कांग्रेस में अभी जान बाकी है. 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्य गंवा बैठी और इन तीनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार बन गई. खास बात यह थी कि इन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी गंवा बैठे, जिनके चेहरे पर यह चुनाव लड़ा गया था. एक समय मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को टक्कर देते दिख रहे थे लेकिन मध्य प्रदेश में चुनाव हारने के बाद उनका ग्राफ तेजी से नीचे गिरा और फिर बाद में उन्हें पीएम मोदी की कृपा पर राज्य में सरकार बनानी पड़ी. राजस्थान में वसुंधरा राजे बीजेपी आलाकमान की नहीं सुनती थीं लेकिन उनकी सरकार को जाना पड़ा था. यही हाल छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की सरकार के साथ हुआ था. उसके बाद बीजेपी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के बदले पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने लगी. कर्नाटक में भी बीजेपी का मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित था और बीजेपी ने वहां किस तरह सरकार बनाई, यह जगजाहिर है.

मुख्यमंत्रियों के भरोसे पर हो गई बुरी गत

2019 में लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव हुए, जिसमें बीजेपी महाराष्ट्र गंवा बैठी और हरियाणा में किसी तरह सरकार बन पाई. इन दोनों राज्यों में भी वहां के मुख्यमंत्रियों के काम पर बीजेपी ने चुनाव लड़ा था. महाराष्ट्र में तो बीजेपी खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस के काम का ढोल पीट रही थी, लेकिन चुनाव के बाद वे बीजेपी को फिर से सत्ता तक नहीं पहुंचा सके. वहीं हरियाणा में मनोहर लाल की सरकार दुष्यंत चौटाला के भरोसे पर चल रही है.

पीएम मोदी के नाम पर देश भर में छा गई बीजेपी

ऐसा नहीं है कि पीएम मोदी का चेहरा आगे करके बीजेपी ने सारे चुनाव जीत लिए लेकिन अधिकांश चुनाव में जरूर जीत हासिल की. वहीं जिन राज्यों में बीजेपी ने मुख्यमंत्रियों का चेहरा आगे किया, उनमें से अधिकांश राज्यों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में मुख्यमंत्रियों के चेहरे से बीजेपी को जीत हासिल नहीं हुई, वहीं पीएम मोदी ने अकेले दम पर महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, असम सहित पूरे पूर्वोत्तर, पुडडूचेरी जैसे राज्यों में बीजेपी की सरकार बनवाई. कई राज्यों में जहां बीजेपी सोच भी नहीं सकती थी, पीएम मोदी ने उन राज्यों में बीजेपी की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई.

कुछ राज्य अब भी बने हुए हैं बीजेपी के लिए चुनौती

यहां तक कि 2021 के विधानसभा चुनाव में असम में बीजेपी का मुख्यमंत्री होने के बाद भी बीजेपी ने सीएम कैंडीडेट घोषित नहीं किया था और वहां भी बीजेपी को भारी बहुमत से जीत हासिल हुई. पीएम मोदी के चेहरे पर जिन राज्यों में जीत नसीब नहीं हुई, उनमें केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा जैसे राज्य शामिल हैं. हालांकि केरल और तमिलनाडु को छोड़कर बीजेपी अब पीएम मोदी के नेतृत्व में वहां सत्ता में काबिज दलों को चुनौती देने में सक्षम जरूर हो गई है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *