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मुरादाबाद किसानों का 32 साल से चल रहा विवाद अभी तक नहीं सुलझा किसान बैठे धरने पर

रिपोर्ट:-शारिक सिद्दीकी

 

उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में किसानों ने कृषि बिल से अलग हटकर एक प्रदर्शन करते हुए चौंका दिया है, प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि 32 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा फैक्ट्री लगाने के लिये किसानों की अधिग्रहण की गयी थी,मुरादाबाद में सैकड़ों एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण करने के 32 साल बाद भी किसानों को कोई मुआवज़ा और फैक्ट्री नही लगी तो न कोई रोजगार देने के आरोप लगाकर धरना प्रदर्शन किया,।

किसानों ने अपनी मांगों को लेकर थाना भगतपुर क्षेत्र के नेपा पेपर मिल के पास किसानो से अधिग्रहण की गई भूमि पर जमा होकर धरना प्रदर्शन किया,इस दौरान किसानों की मांग थी कि हमे या तो हमारी जमीन वापस दी जाए या फ़िर उसका मुआवज़ा दिया जाए,सूचना पर नाराज़ किसानों के बीच पहुंचे प्रशासन के अधिकारियों ने किसानों की बात को गंभीरता से लेते हुए उनसे बातचीत की और वर्तमान में किसानों की जमीन पर स्थापित एक निजी कंपनी के अधिकारियों से बातचीत करने के बाद ये आश्वासन दिलाया है कि जल्द ही किसानों की मांगों को पूरा कराने की कोशिश करेंगे,फिलहाल मुरादाबाद के ये किसान 32 साल पुरानी मांग के पूरा न होने पर किसी भी हद तक जाने को तैयार रहने की चेतावनी दे रहे हैं !

पूरे प्रकरण में जानकारी ये मिली है कि मुरादाबाद जनपद में थाना भगतपुर इलाके में उत्तराखंड की सीमा की पुलिस चौकी जो कभी उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा थी यहाँ किसानो की ज़मीन तत्कालीन कांग्रेस सरकार के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 32 साल पहले सन 1989 में कोई औद्योगिक प्लांट लगाने के लिये वहां के किसानों से सैकड़ों एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया था,और अधिग्रहण इस वादे के साथ किया था कि किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा दिया जाएगा साथ ही यहां जो भी औद्योगिक प्लांट लगेगा,।

यहाँ के लोगो को रोज़गार बबी दिया जाएगा,लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हो गई और उसके बाद यहाँ के किसानों का सपना टूट गया,32 साल बाद इलाके के किसान प्रशासन के सामने आये हैं उनका आरोप है फ़िर नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने,उन्होंने किसानों को ढाई करोड़ रुपए का मुआवज़ा देकर किसानों से ली गई ज़मीन बिरला ग्रुप को 23 करोड़ रुपये मे बेच दी,धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों का नेत्रत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन नेता नेपाल सिंह ने भी कहा कि 32 साल गुज़र जाने के बाद भी आज तक इस अधिग्रहण की गई जमीन पर कोई फैक्टी नही लगी है और ना ही किसी किसान परिवार के एक भी सदस्य को रोजगार मिला है,।

परेशान किसान परिवार सहित अपने हक की लड़ाई के लिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थापित उत्तर प्रदेश की नेपा पुलिस चौकी इलाके में अचानक धरना प्रदर्शन करने पहुंचे किसानों के बारे में जैसे ही मुरादाबाद प्रशासन को सूचना मिली तो हडकंप मच गया,एसडीम ठाकुरद्वारा भी मौके पर पहुंच गए और प्रदर्शन कारी किसानों को समझाने का भरसक प्रयास किया लेकिन कोई बात नहीं बनी,।प्रशासन ने मामले की गम्भीरता समझते हुए क्यूंकि यहाँ बिरला ग्रुप की पेपर मिल की बात थी लिहाजा, ।

प्रदर्शनकारी किसानों से सीधी बात करने के लिए प्रशासन ने किसानों के बीच थाना परिसर में मिल प्रबंधन के अधिकारियों को बुलाकर बात भी की,बातचीत के बाद किसानों को समझाते हुए उनकी समस्या का हल करने के लिए कुछ वक्त देने की मांग की है,इस आश्वासन के बाद किसानों द्वारा धरना तो समाप्त कर दिया गया है लेकिन चेतावनी भी दी है अगर उनकी मांगें नही मानी गई तो संवैधानिक तरीके से अपनी मांगे उठाएंगे,प्रदर्शनकारी किसान साबिर का कहना है कि 32 साल पहले स्वर्गीय राजीव गांधी ने जमीन एक्वायर की थी,नेपा पेपर मिल लगाने के लिए,तो चार साल के लिए जमीन एक्वायर की थी कि जो एशिया का पहला और वर्ल्ड का तीसरे नम्बर नम्बर का पेपर मिल यहाँ बनेगा जिसके बाद ये हुआ कि सरकार ने 4 साल के बाद यहाँ कोई प्लांट लगाया है न यहाँ लोगों को रोजगार दिया है अगर हमारी मांगे पूरी नही होती हैं तो हम संवैधानिक तरीके से अपनी वार्ता उठाएंगे,।

प्रदर्शनकारी किसानों से वार्ता करने के बाद SDM ने जानकारी देते हुए बताया कि बिरला ग्रुप कोई फैक्ट्री लगाना चाहती है किसानों की कुछ समस्या थी,उस सम्बन्ध में कम्पनी के साथ बैठक आयोजित करवाया था, निस्तारण नहीं,किसान मुख्य रूप से ये मांग कर रहे हैं कि फैक्ट्री लगवाया जाए,फैक्ट्री किन कारणों से नहीं लगी है इसके लिए बुलाया गया,किन कारणों से फैक्ट्री नहीं लगी है,कि फैक्ट्री लगाकर विकास का कार्य किया जाए,दुसरी बैठक 15 तारीख को बुलाई गयी है जिसमे किसान भी अपने लोगों से समझेंगे और ये जो कम्पनी के लोग हैं,ये अपने मैनेजमेंट से समझकर बात करेंगे !

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