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मुरादाबाद में मुस्लिम कारीगर ऐसे कर रहे हैं हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश

रिपोर्ट:-शारिक सिद्दीकी

 

एकता और अखंडता की अनोखी पहचान के साथ देश में हर त्यौहार देशवासियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता।इन दिनों देश में असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक भगवान राम की लीलाओं को रामलीला के जरिये चित्रित किया जा रहा है।रामलीलाओं में भले ही हिन्दू समाज की आस्था और विश्वास हो लेकिन मुस्लिम समाज भी इस त्यौहार में अपनी भूमिका निभा रहा है।रावण,मेघनाद और कुम्भकर्ण के विशालकाय पुतले बनाते मुस्लिम कारीगर भी अपने काम के जरिये समाज को एकता और सौहार्द का संदेश दे रहें है।

मुरादाबाद जनपद के लाइनपार क्षेत्र में होने वाली रामलीला को मंडल में सबसे बड़ी रामलीला का दर्जा हासिल है।वर्षों से चली आ रहीं रामलीला में कई परम्पराएं आज भी जस की तस है।

इस साल आयोजित हो रहीं रामलीला में सबसे आकर्षण रावण का 40 फिट पुतला कोरोना के चलते तैयार किया गया है,वरना हर साल लगभग 80 से 95 फिट का पुतला तैयार किया जाता था,।

जिसको बनाने की जिम्मेदारी मेरठ जनपद के रहने वाले सुलेमान के कंधों पर है।अपने साथी कारीगरों की मदद से पिछले पच्चीस दिन से हर रोज इस पुतले को तैयार कर रहें सुलेमान खुश है की उनके काम के जरिये उन्हें अलग पहचान मिली है।

रामलीलाओं में रावण का पुतला बनाने का सिलसिला सुलेमान का बचपन से ही शुरू हो गया था।सुलेमान को रावण का पुतला बनाते हुए लगभग 10 साल का वक्त हो गया है। सुलेमान से पहले उनके दादा और फिर पिता रामलीलाओं में रावण का पुतला तैयार करते थे,।उत्तराखंड,पंजाब,दिल्ली से लेकर उतर प्रदेश के कई जनपदों में अपने इस खास हुनर के चलते हर साल सुलेमान के परिवार को बुलावा जाता है,रामलीला में पुतला बनाने के अलावा सुलेमान साल के अन्य दिनों में मजदूरी कर अपने परिवार का जीवन यापन करते है।

सालों से रामलीला में अपना योगदान दे सुलेमान का परिवार रामलीला भी देखते है और उन्हें रामलीला के तमाम चरित्र याद है।रावण का पुतला तैयार करने में हर रोज सुलेमान और उनके सहयोगी घण्टों काम करते है।रावण को इस इस वर्ष कोरोना के चलते पुतले की लंबाई कम रखी गई और पुतले के स्वरूप में बदलाव करने को लेकर भी सभी सदस्य चर्चा करते है। सुलेमान के मुताबिक पुतले की कोरोना के चलते इस बर्ष 40 फिट का पुतला बनाना गया हैं,लेकिन मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाती है,अलग-अलग हिस्सों में पुतले को तैयार कर उसको बाद में एक साथ जोड़ा जाता है।पुतले का ढांचा तैयार करने के बाद उसको आकर्षक रंगों से सजाया जाता है!

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