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पीलीभीत महिला अस्पताल की सीएमएस ने वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल कर एक नहीं दो नहीं 5-5 बना दिए पार्क

सरकारी अस्पतालों में जब बेड टूट जाते है तो उनका क्या होता है,,,जब ग्लूकोज की बोतल खाली हो जाती तो उनका क्या होता है,ग्लूकोज की बोतल टांगने वाले स्टैंड जब बेकार हो जाते तो उनका क्या होता है,ऐसे ही  तमाम उपकरण जो अस्पतालों में मरीजों के लिए या साफ सफाई के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं और जब वह बेकार जाते हैं तो उनका क्या होता है। इनका किसी अस्पताल के कोने में ढेर,या धीरे धीरे चोरी हो जाते हैं लेकिन पीलीभीत की जिला महिला अस्पताल की सी एम एस डॉ अनीता चौरसिया ने इन वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल कर एक नही दो नही 5-5 पार्क बना दिये।

01- जरा गौर से देखिए इन उपकरणों और बेस्ट समान को आप सोच रहे होंगे हम ये उपवन आप को क्यों दिखा रहे है जरा ठीक से देखे कहीं फिनायल की बोतल में फूल लगे हैं तो कहीं ग्लूकोस टांगने वाले स्टैंड पर टोकरी टंगी हैं तो कहीं सरकारी एंबुलेंस के टायर सजे हुए हैं,तो वही टूटे बैड के सिहराने से गार्डन की बाउंड्री बनी है। आप इन तस्वीरों में जो देख रहे है बो एक दम सही देख रहे है यहाँ टूटे बैड, आई0वी0 स्टेण्ड, बेबी बास्केट, एम्बुलेंस के टायर, फिनायल की बोतलें, मरीजो के बैड की साइड टेविल ,बच्चो के टूटे झूले,ट्रे,जो सामान महिला जिला अस्पताल में इस्तेमाल के बाद बेकार हो जाता उससे गार्डन बना दिया जाता है, जो यहाँ तीमारदार आता है बो सेल्फी लेता है, और एन्जॉय भी करता है वही पीलीभीत के जिला अस्पताल की तारीफ करते नही थकता।

– जगन्नाथ / सभासद

वी/ओ 02- सुना अपने अस्पातल  में जो आता है बो उपवन को देखता रह जाता है,अब हम आपको मिलबाते इस उपवन के माली से ये माली कोई आम माली नही है ये माली बीते 20 साल से यहाँ डॉ के रूप में सेवा दे रही है और अब बीते 3 साल से सी एम एस बन कर पूरे अस्पातल की देख रेख कर रही है, ये है 58 साल की डॉ अनीता चौरसिया, सी एम एस बनते ही अपने खानदानी शौक को पूरा करने में जुट गई,और पीलीभीत में महिला जिला अस्पताल के अंदर इसी तरह के 5 गार्डन बना दिए हैं यह गार्डन सीएमएस  डॉक्टर अनीता चौरसिया ने खुद बनाए हैं उनके दिमाग में आया की यह इतना सामान तो बेकार है इनका क्या करा जाए तो उन्होंने इस सारे सामान का इस्तेमाल अपने महिला अस्पताल में गार्डन बनाने में किया आप गार्डन की तस्वीरें देख रहे हैं पूरे जिला महिला अस्पताल में डॉ चौरसिया ने 5 उपवन बनाये है,ये इतने खूव सूरत है कि जिले के नामी गिरामी डॉक्टर यहाँ खड़े होकर फ़ोटो क्लिक कराते है,,स्टाफ़ और मरीज सेल्फी भी लेते है,,सभी गार्डन में स्टाफ के लोग बैठ कर काम भी करते हैं,,इन उपवनों को देखकर डॉ चौरसिया से लोग अपने घर ,आफिस, नगर पालिका, शहर के चौराहे को कैसे सजाए इसका आइडिया लेने आते है, महिला अस्पताल में पाचो बाटिका के अलग अलग नाम भी रखे गये है,,सुवह शाम इन उपवनों में बाँसुरी की धुन भी सुनाई देती है,महिला अस्पातल में जो गर्भवती महिला आती या उनके साथ जो परिजन आते बो ये सब देख कर यहां थोड़ा समय जरूर व्यतीत करते है। सुभाष  वाटिका,शहीद दामोदरदास वाटिका,शहीद नत्थू लाल वाटिका,शहीद माखनलाल वाटिका,स्वराज वाटिका,तुलसी वाटिका, इनके उपवनों के नाम है साथ ही तुलसी वाटिका, हर्बल गार्डन भी बने है, अस्पताल में जो वेस्ट मटेरियल निकलता है जैसे टूटे हुए पलंग, हमारी 102 एंबुलेंस के पुराने टायर , पैथोलॉजी की बोतले , बच्चों की टूटे हुए झूले हैं, आईवी स्टैंड है ,आदि का इस्तेमाल किया गया इन उपवन में,खुद ही खाद बनाते है इन उपवनों के लिये, पूरी तरह ऑर्गेनिक है,

डॉ अनिता चौरसिया/ cms जिला महिला अस्पातल पीलीभीत

वी/ओ 03- उपवन देखकर लगता है पूरे प्रदेश में या यूं कहें पूरे देश मे इस तरह का ये पहला महिला जिला अस्पताल होगा,अमूमन प्रदेश में जिला अस्पातलो से खामियों की खबरे खूव आती है लेकिन पीलीभीत ने डॉ अनिता चौरसिया के तिनका तिनका कूड़ा जोड़ कर जो प्रयास किया है बो काबिले तारीफ है, और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को इसको मॉडल के रूप में प्रमोट करना चाहिये,, ताकि आने बाले चुनाव में केजरीवाल की आप पार्टी के सरकारी स्कूलों की टक्कर यूपी के जिला अस्पातल से दे सके,जरूत पड़ने पर अस्पताल का स्टाफ भी इसमें मदद करता है वही जरूरत पड़ने पर अब मिल कर खर्च भी करते है।

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