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सिद्धार्थनगर में व्यक्ति की मौत पर सरकारी अस्पताल में हंगामा ये है कारण

रिपोर्ट:-डॉ बलराम त्रिपाठी

 

प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह के गृह जनपद सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बद से बद्तरहो चुकी हैं। विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही इस तरह की हो गई है कि मरीज गम्भीर हाल में हो तो अस्पताल के गेट पर ही दम तोड़ दे।

ताजा मामला सिद्धार्थनगर के उसका थानाक्षेत्र के तेतरी चौराहे का है जहां सुबह एक साईकिल व मोटरसाईकिल में एक्सीडेंट हुआ।जिसमें एक चालीस वर्षीय व्यक्ति साईकिल सवार गम्भीर रूप से घायल हो जाता है।

घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने उसे नजदीक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उसका पहुंचाया लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल में परिजनों के भटकने के बाद भी इलाज नहीं हुआ और स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टरों की घोर लापरवाही के चलते घायल व्यक्ति ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया।

जिसके बाद मृतक के परिजनों व ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।सूचना पाकर स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुची लेकिन मामला और बढ गया।जिसके बाद क्षेत्र के एसडीएम व सीओ और चार थानों की पुलिस भी आ गई।लेकिन मामला ठंडा नहीं पड़ा वहीं मामले में मृतक के परिजन ने बताया कि घायल को लेकर जब हम अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई नहीं था।काफी हो हल्ले के बाद डाक्टर देर से पहुंचे और दूसरे परिजन ने बताया कि डेढ़ घंटे तक परिजन डाक्टर को बुलाते रहे।

लेकिन वह नहीं आये जिससे घायल की मौत हो गई।वहीं इस घटना में सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ अविनाश चौधरी ने बताया कि मरीज को ओपीडी में लाया गया जहां पर नर्स व फार्मासिस्ट ने फस्टऐड दिया।लेकिन डाक्टर इमरजेंसी वार्ड में थे इमरजेंसी से ओपीडी में जाने में जितना टाइम लगा और व्यक्ति की मौत हो गई।ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री के जिले मे स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से आये दिन ऐसी घटनाएं होती रहती है।परंतु लापरवाहों पर कार्यवाही नहीं होने से पीडितों के साथ हो रहे अन्याय के जिम्मेदार आखिर कौन है ये बड़ा सवाल है।

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