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विश्व उर्दू दिवस पर सब की आवाज अदबी संस्था तुलसीपुर के बैनर तले हुआ मुशायरा का आयोजन

(बलरामपुर/तुलसीपुर) विश्व उर्दू दिवस पर भव्य मुशायरा का आयोजन सबकी आवाज़ अदबी संस्था तुलसीपुर के बैनर तले उर्दू दिवस के अवसर पर एक शाम डॉ अल्लामा इक़बाल के नाम एक अॉल इंडिया मुशायरा का आयोजन जूम एप पर किया गया जिसकी अध्यक्षता श्री ताहिर सऊद किरतपुरी एवं संचालन श्री नदीम सादिक सिद्धार्थनगरी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में श्री फैजान अहमद जिला सचिव बलरामपुर समाजवादी पार्टी (युवा नेता) उत्तर प्रदेश उपस्थित रहे। तंजीम के अध्यक्ष श्री अताउल्लाह ख़ान सादिक़ ने अल्लामा इक़बाल की शायरी पर रोशनी डालते हुए कहा कि आज उर्दू शायरी बहुत बुलंदीयों पर पहुंच चुकी है मगर वह पहले जैसी चाशनी आज की शायरी में नहीं देखने को मिलती और इक़बाल साहब जैसी लबो लहजा नज़र नहीं आता बड़े अफसोस के साथ सादिक साहब ने कहा— शेरो सुखन का नज्म बुलंदी पर है मगर
इक़बाल जैसी शायरी कम देख रहे हैं।

शायरों के द्वारा प्रस्तुत कुछ पंक्तियां

कितनी शीरीनी जी जनाब में है
लुत्फ़ आओ उठाऐं सब के सब
(अताउल्ला खान सादिक)

तेरी मकबूलियत से ऐसा लगता है कि ऐ उर्दू
किसी दरवेश ने तुझको तहज्जुद पढ़ के मांगा है।
(ताहिर सऊद किरतपुरी)

कम हो नहीं सकती कभी उर्दू की बड़ाई
सर पीट के मर जाऐं यह शैतान के भाई
(मुजाहिद लालटेन इलाहाबादी)

पतवार बिन तो नय्या लगती नही किनारे
मिल जाएं गर सहारा चढ़ जाए छत पे बेले
(सरफराज हुसैन फराज मुरादाबादी)

तुम रहोगे सलामत मुझे है यकीन
इतनी रब से दुआऐं मै कर जाऊंगा।
(कमरूजमा बिहार)

कहते हो यह धरती अपनी माता है ।
फिर इस पर कोहराम किये हो तुम भी ना
(नदीम सादिक सिद्धार्थनगरी)

जो रंजिशें थी उन्हें बरकरार रहने दिया
मगर जो प्यार था दिल में वह प्यार रहने दिया
(डॉ गुलनाज़ सिद्दीकी)

लम्हों में दुशमनों को अपना बना ले जो
तासीर वह कहां है तेरे ब्यान में
(काजिम शिराजी)

दूसरों के तमसखर पे हसना तो क्या
जेरे लब मुस्कुराना गलत बात है
(असदउल्ला असद अमवावी)

मुशायरे के अन्त में मुशायरा कन्वीनर शायर श्री तनवीर साकिब रनियापुरी ने सभी शायरों एवं अतिथियों का दिल से आभार व्यक्त किया इस अवसर पर शायर नईम नजमी रामपुरी भी उपस्थित रहे। संचालक महोदय के घोषणा पर मुशायरा का समापन किया गया

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